ज़ायोनी मीडिया ने बताया है कि अमरीका के रक्षा मंत्री माइक स्पर की सऊदी अरब की यात्रा के दौरान एक वरिष्ठ इस्राईली अधिकारी ने भी उच्च सऊदी अधिकारियों से मुलाक़ात की है। जेरुसलम पोस्ट ने लिखा है कि इस्राईल व सऊदी अरब के बीच हालिया अस्पष्ट उड़ानें यह सवाल पैदा करती हैं कि क्या बेनयामिन नेतनयाहू ने रियाज़ की यात्रा करके मुहम्मद बिन सलमान से मुलाक़ात की है?
हारेत्ज़ समाचारपत्र के एक टीकाकार आवरी शारेफ़ ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि एक निजी विमान ने रियाज़ व तेल अवीव के बीच संदिग्ध उड़ान भरी है। उन्होंने रियाज़ में अमरीका, सऊदी अरब और इस्राईल की गुप्त त्रिपक्षीय मुलाक़ात की संभावना प्रकट की थी। इससे पहले क्षेत्र में इस्राईल से संबंध स्थापित करने के पक्षधर कुछ अरब देशों के अधिकारियों का आग्रह होता था कि ज़ायोनी शासन से उनका सहयोग, गोपनीय रहे क्योंकि वे उसके सामाजिक संदेश से भयभीत रहते थे। अहम बात यह है कि इस्राईल भी इस संबंध में अरब अधिकारियों की चिंता को समझता था लेकिन आज कल इस्राईल भी और अरब देश भी अब अपने संबंधों को गोपनीय रखने पर आग्रह नहीं कर रहे हैं। जेरुसलम पोस्ट ने लिखा है कि चेलेंजर-604 प्रकार के एक निजी विमान ने सोमवार की रात बिन गोरियन हवाई अड्डे से जाॅर्डन की राजधान में एक हवाई अड्डे की ओर उड़ान भरी थी और दो मिनट रुकने के बाद वह सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ के किसी हवाई अड्डे की ओर बढ़ गया था। यह विमान 55 मिनट तक रियाज़ में रुका रहा और उसके बाद सीधे बिन गोरियन एयरपोर्ट लौट आया था। पत्र ने लिखा कि फ़्लाइट रडार वेबसाइट पर इस विमान की उड़ान के रास्ते की खोज करने से पता चलता है कि इसने पिछले कुछ महीनों में तेल अवीव व क़ाहेरा के बीच कई बार उड़ान भरी है। इस विमान का रियाज़ से सीधे तेल अवीव पहुंचना कई सवाल खड़े करता है ख़ास कर इस लिए भी कि इस्राईल से सऊदी अरब के खुले व औपचारिक संबंध नहीं हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि इस्राईल इन संबंधों को प्रकट करके अपने आपको क्षेत्र में एक वैध सरकार दिखाने की कोशिश कर रहा है। अरब देशों को भी, जो क्षेत्र में अपनी स्थिति को अत्यंत कमज़ोर देख रहे हैं, अमरीका व यूरोप और ख़ास तौर पर ज़ायोनी लाॅबी को ख़ुश करने के अलावा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। उनकी नज़र में इन तीनों को ख़ुश करने का सबसे अच्छा मार्ग, ज़ायोनी शासन के साथ अपने संबंधों को बढ़ाना ही है। इस्राईल के मआरियो समाचारपत्र के सुरक्षा मामलों के टीकाकार यूसी मीलमैन ने भी अपने एक ट्वीट में कहा है कि संभावित रूप से इस विमान में इस्राईल के प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू या मूसाद के चीफ़ यूसी कोहने सवार थे जो सीरिया के मामले में सऊदी अधिकारियों से बात करने के लिए रियाज़ गए थे। विशेष कर इस लिए भी कि अमरीका के रक्षा मंत्री मार्क स्पर, इस विमान की रियाज़ की ओर उड़ान के दौरान सऊदी अरब में ही थे। इस विमान की संदिग्ध उड़ान कुछ अरब देशों के साथ इस्राईल के संबंधों के बारे में नेतनयाहू के बयान की याद दिलाती है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्राईल के कुछ अहम अरब देशों से संबंध स्थापित हो चुके हैं जिनके तेल अवीव से औपचारिक व कूटनैतिक संबंध नहीं हैं। इस्राईली अधिकारियों ने अब तक इस संदिग्ध उड़ान के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।
इससे कुछ ही दिन पहले बहरैन में समुद्री सुरक्षा के बारे मे एक काॅन्फ़्रेंस आयोजित हुई थी जिसकी एक बड़ी विशेषता इसमें अमरीकी व इस्राईली अधिकारियों ने खुल कर भाग लिया था और इसे क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में काफ़ी कवरेज भी दी गई थी। इस्राईल सोच रहा है कि वह अरब राष्ट्राध्यक्षों की डगमगाती स्थिति से ग़लत लाभ उठा कर और अरब देशों के साथ अपने व्यापक संबंधों का ढिंढोरा पीट कर अपने आपको क्षेत्र में एक स्वाभाविक व स्वीकार्य सरकार दिखाने का प्रयास कर रहा है लेकिन यह उसकी ग़लत फ़हमी है क्योंकि दीर्घकाल में इस राजनैतिक व प्रचारिक हथकंडे का जो सबसे अहम परिणाम सामने आएगा वह यह है किस्वयं अरब देशों की जनता के बीच उनके नेताओं और सरकारों की वैधता समाप्त हो जाएगी और ज़ायोनी शासन, अमरीका व यूरोप की पोज़ीशन पहले से भी कमज़ोर हो जाएगी। बहरहाल क्षेत्र में ज़ायोनी शासन, अमरीका व यूरोप के क़दमों को जिस चीज़ ने मज़बूत बनाया है वह यही अरब सरकारें हैं।